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मोदी की मजबूरी का एनालिसिस:पीएम मोदी के संबोधन का कंटेंट जो भी हो इंटेंट क्या होगा, मोदी और उनकी सरकार या पार्टी के लिए इस संबोधन के क्या मायने होंगे?

नई दिल्ली

आज पीएम मोदी के संबोधन में क्या होगा से ज्यादा ये क्यों हो रहा है चर्चा में है। शाम 5 बजे जब मोदी राष्ट्र को संबोधित करेंगे तो वो क्या बोलेंगे और क्यों बोलेंगे? 15 महीने में नौंवा और 3 महीने में ही दूसरा। क्या बोलेंगे यह तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उनका भाषण कोरोना की दूसरी लहर के बाद उपजे हालात, उससे लड़ाई और वैक्सीनेशन के लिए लोगों को उत्साहित करना होगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर मोदी अभी और ऐसा क्यों बोलेंगे?

जवाब है इमेज करेक्शन। कोरोना की दूसरी लहर में केंद्र सरकार, भाजपा और खुद मोदी की इमेज पर सवाल उठे। और PM के तौर पर तो मोदी पहली बार घिरे हैं। इस इमेज को सुधारने के लिए अब वो खुद ही एक्शन में दिखेंगे। राष्ट्र के नाम ये संदेश इसी दिशा में चला गया कदम है।

इमेज को सुधारना क्यों जरूरी?

पीएम मोदी की सरकार कोरोना की दूसरी लहर के पहले तक एक मजबूत सरकार मानी जाती थी। 56 इंच सीने की सरकार का पिछले 56 दिनों में विश्वास हिल गया था। देश के अंदर मोदी और पार्टी की छवि खराब हुई तो अंतरराष्ट्रीय स्तरा पर खुद मोदी और सरकार की साख पर बट्टा लग गया। गंगा किनारे की लाशों की तस्वीरों ने देश के प्रति दुनिया का नजरिया बदल दिया।

इसके बाद संघ, संगठन और सरकार के स्तर पर गहन मंथन हुआ। पीएम मोदी ने सबके साथ वन-टू-वन चर्चा की। अब इस मंथन से निकले निष्कर्ष पर पूरी ताकत से काम करने की तैयारी है।

आज की स्पीच में क्या बड़ा होगा?

मोदी अपनी स्पीच में ये बता सकते हैं कि लॉकडाउन खत्म हो रहे हैं। कर्फ्यू हट रहा है तो लोगों को करना क्या है। दूसरा वे कोरोना की दूसरी लहर के बीच 12वीं बोर्ड के एग्जाम रद्द करने का क्रेडिट अपनी सरकार को दे सकते हैं, जो वाकई छात्रों की सेहत को देखते हुए बड़ा फैसला है। वैक्सीनेशन को लेकर लोगों के मन की शंका दूर करने की कोशिश करेंगे। इसकी उपलब्धता और आने वाले समय में कवरेज को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।

इस पूरी कवायद में मोदी का रोल?

डैमेज कंट्रोल के लिए बनी रणनीति में नरेंद्र मोदी अपनी सरकार और पार्टी की तरफ से ओपनिंग बैट्समैन की भूमिका में रहेंगे। यह संबोधन उसी का हिस्सा माना जा रहा है। जिस तरह UPA सरकार अपने दूसरी कार्यकाल के दो साल बाद वैश्विक रेटिंग्स में नीचे चली गई थी, वही अब मोदी सरकार के साथ भी हो रहा है।

मौजूदा आंकड़ा यूनाइटेड नेशंस के 193 देशों की ओर से अपनाए गए 17 सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) की ताजा रैंकिंग है, जिसमें भारत 2 स्थान खिसककर 117वें नंबर पर आ गया है। नेपाल-बांग्लादेश से भी खराब पोजिशन में! अब मोदी का रोल ही अहम है, जो लगातार जनता से सीधा संवाद करते रहे हैं। वो इसी संवाद के जरिए जनता को फेवर में लाने की कोशिश करेंगे। साथ ही सरकार और मोदी के लिए बनी छवि को बदलने की कोशिश भी।

कौन से और अहम कदम उठा सकते हैं?

पहला: कोरोना की दूसरी लहर अभी संभली स्थिति में है, लेकिन तीसरी लहर चुनौती है। ऐसे में मोदी देश में हेल्थ सर्विसेज को अपग्रेड करने पर बड़ी घोषणा कर सकते है। एक लाख से ज्यादा इमरजेंसी हेल्थ केयर वर्कर्स की फोर्स तैयार करना भी इसी दिशा में उठाया एक कदम हो सकता है। यह स्काउट गाइड, रेड क्रॉस या एनडीआरएफ की तर्ज पर हो सकती है। इस फोर्स को इन्हीं सेवाओं के साथ भी मर्ज किया जा सकता है।

दूसरा: संघ और पार्टी के साथ मोदी और शाह का जो मंथन हुआ है, उसमें केंद्रीय मंत्रिमंडल को भी लेकर चर्चा हुई है। मंत्रिमंडल में बदलाव भी जल्द हो सकता है। इस बदलाव में चौंकाने वाले नाम आ सकते हैं। इन्हें पॉलिटिकल चेहरों से ज्यादा टेक्नोक्रेट्स को मौका दिया जा सकता है।

तीसरा: भाजपा दावा करती है कि वो दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके 11 करोड़ से ज्यादा कार्यकर्ता हैं। लेकिन, कोरोना के दौर में भाजपा के कार्यकर्ता कहीं नजर नहीं आए। पिछले दिनों हुए मंथन में मोदी-शाह और नड्डा के साथ संघ ने भी इस पर चिंता जाहिर की। नतीजा ये निकला कि पीएम के तौर पर 26 मई को मोदी ने 7 साल पूरे कर लिए, पर इसके बावजूद कोई जश्न नहीं मनाया गया। नड्डा ने सीधा संदेश कार्यकर्ताओं को दिया था कि वे कोरोना काल में जरूरतमंदों की मदद, ऑक्सीजन, बेड और वैक्सीन जैसी चीजों पर फोकस करें। इसी स्ट्रैटजी को आगे भी लागू किया जा सकता है, क्योंकि जब विपक्ष ने भाजपा को इस मोर्चे पर घेरा था तो वो कमजोर पड़ गई थी।

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